7 Chapters


"लोग कहते हैं कि शैतान के सीने में दिल नहीं होता, और फरिश्तों का ठिकाना कभी ज़मीन पर नहीं होता। लेकिन जब बनारस के सबसे खूंखार, बेरहम और जघन्य माफिया—'द बीस्ट' का सामना गंगा के घाटों जैसी पवित्र, मासूम और निश्छल लड़की 'कशिश' से हुआ... तो नियति का सबसे बड़ा खेल शुरू हो गया।" यह कहानी सिर्फ प्यार की नहीं है, यह कहानी है एक तरफा दीवानगी, डार्क रोमांस और रूह के समर्पण की। द बीस्ट (The Beast): जिसके लिए कानून महज़ एक मज़ाक है, जिसका नाम ही पूर्वांचल का सबसे बड़ा खौफ है। जिसके हाथों ने सिर्फ खून बहाना और दुनिया को झुकाना सीखा है। हिज़ एंजेल (His Angel - कशिश): जो सादगी की मूरत है, जिसकी आँखों में पवित्रता का समंदर है, और जो अपने बीमार पिता की सेवा को ही अपनी दुनिया मानती है। जब बीस्ट की हिंसक दुनिया में इस पावन फरिश्ते की एंट्री होती है, तो वह उसे सिर्फ अपना बनाने के लिए नहीं, बल्कि उसकी हर सांस पर अपना हक जमाने के लिए किसी भी हद को पार करने के लिए तैयार हो जाता है। वह उसके दुश्मनों के लिए काल है, तो उसके आंसुओं के आगे बेबस एक आशिक। क्या कशिश इस खूंखार शैतान के फौलादी पिंजरे से भाग पाएगी? या फिर बीस्ट की यह बेपनाह, डार्क दीवानगी इस एंजेल को हमेशा-कमेशा के लिए उसका बना देगी?
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