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सिंहानिया की साज़िश

बनारस के बाहरी इलाके में स्थित एक सुनसान, बंद पड़ी सीमेंट फैक्ट्री के भीतर 'सिंहानिया' अपने कुछ नए और बेहद खतरनाक शूटरों के साथ बैठा हुआ था। नेपाल और यूपी के बॉर्डर से आए ये शार्पशूटर सिर्फ पैसों के लिए किसी की भी गर्दन काटने का दम रखते थे। सिंहानिया के चेहरे पर मणिकर्णिका घाट वाली हार की खीझ साफ़ देखी जा सकती थी।

"बीस्ट ने मेरे धंधे पर हाथ डाला है, मेरे आदमियों के हाथ कटवाए हैं। लेकिन मुझे पता चल गया है कि उस पत्थर के सीने में भी एक कमज़ोर दिल धड़कने लगा है," सिंहानिया ने सिगार का धुआँ हवा में उड़ाते हुए एक गंदी हंसी हंसी। "पंडित की वो लड़की... कशिश। वही बीस्ट की जान है। आज रात जब बीस्ट अपने ठिकानों को संभालने में मसरूफ होगा, तुम लोग 'किंगडम' पर धावा बोलोगे। मुझे वो लड़की ज़िंदा चाहिए।"

उधर, 'द किंगडम' के भीतर सन्नाटा पसरा हुआ था। रात के ठीक दो बज रहे थे। कशिश अपने कमरे में बेड पर करवटें बदल रही थी। उसे रह-रहकर बीस्ट की वो सुलगती आँखें और उसका वो फौलादी स्पर्श याद आ रहा था, जिसने उसकी पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया था। वह एक अपराधी से नफ़रत करना चाहती थी, लेकिन उसके पिता की जान बचाने वाले उस रक्षक के लिए उसके दिल के किसी कोने में एक अजीब सी कशिश भी पैदा हो रही थी।

धांय! धांय! धांय!

अचानक महल के बाहरी अहाते से गोलियों की तड़ातड़ गूँज उठी। कशिश झटके से बेड पर उठ बैठी। उसका पूरा शरीर डर के मारे कांपने लगा। खिड़की के बाहर अलार्म के सायरन ज़ोर-ज़ोर से बजने लगे थे और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई थी। सिंहानिया के शूटरों ने भारी हथियारों के साथ महल के पिछले हिस्से की दीवार तोड़ दी थी और वे अंधाधुंध फायरिंग करते हुए भीतर घुस रहे थे।

"भाभी जी! कमरे के अंदर ही रहिए!" समीर की आवाज़ दरवाजे के बाहर से गूँजी, जो अपने आदमियों के साथ मोर्चा संभाले हुए था। कशिश ने डर के मारे कमरे के कोने में रखे एक बड़े महोगनी के वॉर्डरोब के पीछे खुद को छिपा लिया और अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं।

सिंहानिया के शूटरों की तादाद बहुत ज्यादा थी। उन्होंने समीर के तीन गार्ड्स को ढेर कर दिया था और वे सीढ़ियों से होते हुए कशिश के कमरे की तरफ बढ़ रहे थे। उनका लीडर, एक खूंखार शूटर जिसके चेहरे पर एक गहरा कट था, उसने कशिश के कमरे के भारी दरवाज़े पर बम लगा दिया।

ब्लास्ट!

एक ज़ोरदार धमाके के साथ कशिश के कमरे का दरवाज़ा टूटकर बिखर गया। कमरे में धुआँ ही धुआँ फैल गया। कशिश डर के मारे चीख पड़ी।

"ढूंढो उसे! वो यहीं कहीं छिपी है!" शूटरों का लीडर चिल्लाया। कशिश वॉर्डरोब के पीछे दुबकी हुई थी, उसका दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था मानो अभी उसकी सांसें रुक जाएंगी। एक शूटर धीरे-धीरे उस वॉर्डरोब की तरफ बढ़ने लगा। उसने कशिश को देख लिया और एक गंदी मुस्कान के साथ अपनी गन उसकी तरफ तानी। "मिल गई बीस्ट की चिड़िया..."

ठांय!

इससे पहले कि वह शूटर ट्रिगर दबा पाता, एक खौफनाक गोली सीधे उसकी खोपड़ी के पार निकल गई। वह बिना एक आवाज़ किए वहीं ढेर हो गया।

धुएँ के गुबार को चीरते हुए साक्षात काल बनकर 'द बीस्ट' कमरे के भीतर दाखिल हुआ। उसकी आँखें गुस्से में बिल्कुल लाल हो चुकी थीं। उसके दोनों हाथों में दो ऑटोमैटिक असॉल्ट राइफलें थीं। उसने जैसे ही कशिश को डरा-सहमा, वॉर्डरोब के पीछे रोते हुए देखा, उसके भीतर का जानवर पूरी तरह जाग उठा।

"मेरी इजाज़त के बिना मेरी एंजेल को छूने की सोच भी कैसे ली तुम लोगों ने?" बीस्ट की आवाज़ किसी दहाड़ जैसी थी।

इसके बाद जो हुआ, वह महज़ एक लड़ाई नहीं, बल्कि एक खूनी कत्लेआम था। बीस्ट ने बिना पलक झपकाए अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की रफ़्तार और बीस्ट का गुस्सा इतना खूंखार था कि सामने खड़े शूटरों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। बीस्ट ने राइफल खाली होते ही उसे ज़मीन पर फेंका और अपनी कमर से दो भारी खंजर निकाल लिए। वह एक आदमखोर चीते की तरह उन पर झपटा। कमरे की दीवारों पर दुश्मनों का खून छिटकने लगा। चीखें, तड़प और मांस के कटने की आवाजें कमरे में गूँज उठीं। मात्र तीन मिनट के भीतर कशिश का आलीशान कमरा एक कसाईखाने में तब्दील हो चुका था। सिंहानिया के सारे शूटर ज़मीन पर बेजान पड़े थे।

कमरे में अब सिर्फ बीस्ट की भारी और तेज़ सांसों की आवाज़ आ रही थी। उसका पूरा चेहरा, उसके कपड़े और उसके हाथ दुश्मनों के खून से सने हुए थे। कशिश वॉर्डरोब के पीछे खड़ी थर-थर कांप रही थी। उसने अपनी ज़िंदगी में कभी इतना खौफनाक मंज़र नहीं देखा था।

बीस्ट ने अपने हाथ से खंजर नीचे गिराया। वह धीरे-धीरे कदम बढ़ाता हुआ कशिश की तरफ आया। कशिश डर के मारे दीवार से चिपक गई। बीस्ट उसके बिल्कुल सामने आकर रुक गया। उसके शरीर से बारूद और ताज़े खून की तीखी गंध आ रही थी।

बीस्ट ने अपना दाहिना हाथ आगे बढ़ाया, जो पूरी तरह लहूलुहान था। कशिश ने डरकर अपनी आँखें बंद कर लीं। लेकिन बीस्ट ने उसे कोई चोट नहीं पहुँचाई। उसने बहुत ही कोमलता से अपनी खून से सनी उंगली को कशिश के माथे के ठीक बीचों-बीच फेर दिया।

कशिश ने झटके से अपनी आँखें खोलीं। बीस्ट ने कशिश की माँग के ऊपरी हिस्से और माथे पर दुश्मनों के खून से 'लहू का तिलक' लगा दिया था।

"यह... यह क्या किया आपने?" कशिश की आवाज़ गले में ही फंस गई, उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

बीस्ट थोड़ा और नीचे झुका, उसकी सुलगती भूरी आँखें कशिश की रूह को नाप रही थीं। "यह इस बीस्ट का अपनी एंजेल के लिए एलान है, कशिश। आज इन दुश्मनों के खून से मैंने तुम्हारा तिलक किया है। आज से तुम सिर्फ मेरी हो। इस पूरे ब्रह्मांड में ऐसी कोई ताकत नहीं है जो तुम्हें मुझसे जुदा कर सके। सिंहानिया ने तुम्हारी तरफ आँख उठाने की जुर्रत की है... अब बनारस गवाह बनेगा कि अपनी अमानत के लिए यह बीस्ट किस हद तक जा सकता है।"

कशिश ने बेबसी और एक अजीब से अनजाने अहसास के साथ बीस्ट के उस खूंखार चेहरे को देखा। वह उस शैतान की दीवानगी के चक्रव्यूह में इस कदर फंस चुकी थी, जहाँ से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। बीस्ट ने मुड़कर समीर को देखा जो दरवाजे पर खड़ा था।

"समीर... गाड़ियों का काफिला तैयार करो। आज रात ही सिंहानिया साम्राज्य का आखिरी दिन होगा।" বিस्ट की आवाज़ में मौत का फरमान था।

The Beast and His Angel' का यह चौथा अध्याय आपको कैसा लगा? नीचे कमेंट्स में अपनी थ्योरीज़ और विचार ज़रूर साझा करें:

बीस्ट का अपनी एंजेल कशिश को बचाने के लिए वो खूनी तांडव करना और दुश्मनों के लहू से कशिश का तिलक करना—यह सीन आपको कितना थ्रिलिंग लगा?

बीस्ट अब सिंहानिया को पूरी तरह मिटाने के लिए निकल चुका है। क्या कशिश बीस्ट के इस खूंखार रूप को देखकर उससे दूर होगी या उसके प्यार की गहराई को समझेगी?

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